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इलाहाबाद हाई कोर्ट, लखनऊ खंडपीठ में अधिवक्ता

अधिवक्ता सौरभ रावत इलाहाबाद हाई कोर्ट, लखनऊ खंडपीठ के सामने पेश होते हैं। यह पेज बताता है कि कौन से मामले हाई कोर्ट जाते हैं और मामला जिला न्यायालय से वहां तक कैसे पहुंचता है।

यह एक प्रैक्टिसिंग एडवोकेट द्वारा दी गई सूचनात्मक जानकारी है। आधिकारिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित अदालत की अपनी वेबसाइट देखें।

हाई कोर्ट लखनऊ खंडपीठ के बारे में

अदालत का पूरा और सही नाम इलाहाबाद हाई कोर्ट, लखनऊ खंडपीठ है। लखनऊ खंडपीठ की इमारत गोमती नगर (विभूति खंड) में स्थित है। यह उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र में अपने क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र के भीतर आने वाले जिलों से जुड़े मामलों की सुनवाई करती है।

कौन से मामले हाई कोर्ट जाते हैं

कई तरह के मामले हाई कोर्ट लखनऊ खंडपीठ में दाखिल होते हैं या वहां पहुंचते हैं: सत्र न्यायालय से इनकार के बाद जमानत अर्जियां (धारा 483 BNSS, पूर्व धारा 439 CrPC), अग्रिम जमानत (धारा 482 BNSS, पूर्व धारा 438 CrPC), FIR रद्द करने की याचिकाएं (धारा 528 BNSS, पूर्व धारा 482 CrPC), आपराधिक अपील, रिट याचिकाएं, और सिविल अपीलीय काम। अधिवक्ता इस स्तर पर रद्दीकरण, अग्रिम जमानत, और नियमित जमानत के मामले संभालते हैं, जिनमें से हर एक को नीचे लिंक किए गए पेजों पर विस्तार से समझाया गया है।

मामला हाई कोर्ट तक कैसे पहुंचता है

कई मामले जिला न्यायालय में पहले किसी चरण से गुज़रने के बाद हाई कोर्ट पहुंचते हैं — उदाहरण के लिए, सत्र न्यायालय से जमानत न मिलने के बाद हाई कोर्ट लखनऊ खंडपीठ में जमानत अर्जी दाखिल की जा सकती है। कुछ अन्य मामले, जैसे FIR रद्दीकरण याचिकाएं और कुछ रिट याचिकाएं, सीधे हाई कोर्ट में दाखिल होती हैं। हाई कोर्ट के मामलों पर परामर्श के लिए मड़ियांव और कैसरबाग, दोनों चैंबर उपलब्ध हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

यह पृष्ठ केवल सामान्य जानकारी के लिए है और कानूनी सलाह या याचना (solicitation) नहीं है। परिणाम प्रत्येक मामले के तथ्यों पर निर्भर करते हैं। भारतीय बार काउंसिल के नियमों के अनुसार, यह वेबसाइट कार्य का विज्ञापन या याचना नहीं करती।

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