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Practice Area

लखनऊ में पारिवारिक कानून अधिवक्ता

लखनऊ न्यायालय में तलाक, हिरासत और वैवाहिक विवादों में कानूनी प्रतिनिधित्व।

Overview

पारिवारिक झगड़े भावनात्मक रूप से बेहद थकाने वाले होते हैं। हमारा मकसद बातचीत और अदालती पैरवी दोनों के जरिये हल निकालना है — जिसमें गोपनीयता, बच्चों की भलाई और उचित समझौता हमेशा पहले रहता है। पारिवारिक मामलों को लखनऊ जिला न्यायालय में संवेदनशीलता और गोपनीयता के साथ संभाला जाता है।

Our Services

आपसी सहमति और विवादित तलाक
बच्चों की कस्टडी
गुजारा भत्ते के दावे
घरेलू हिंसा (DV Act) से बचाव
वैवाहिक अधिकारों की बहाली

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Detailed Service Pages

लखनऊ में पारिवारिक कानून अधिवक्ता — Specific Matters

फैमिली कोर्ट लखनऊ

पारिवारिक न्यायालय अधिनियम 1984 के तहत स्थापित फैमिली कोर्ट लखनऊ को लखनऊ जिले के भीतर वैवाहिक विवादों, तलाक याचिकाओं, कस्टडी मामलों और भरण-पोषण आवेदनों पर विशेष क्षेत्राधिकार प्राप्त है। यह न्यायालय सिविल कोर्ट परिसर, लखनऊ में स्थित है। अधिवक्ता सौरभ रावत फैमिली कोर्ट लखनऊ की कार्यवाही में मुवक्किलों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसमें आपसी सहमति से तलाक, विवादित तलाक और बच्चों की कस्टडी सुनवाई शामिल हैं।

  • आपसी सहमति तलाक याचिकाएं — फैमिली कोर्ट लखनऊ
  • हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के तहत विवादित तलाक
  • बच्चों की कस्टडी और मुलाकात संबंधी आवेदन
  • धारा 144 BNSS (पूर्व धारा 125 CrPC) के तहत भरण-पोषण और गुजारा भत्ता
  • घरेलू हिंसा अधिनियम कार्यवाही

फैमिली कोर्ट लखनऊ में तलाक की प्रक्रिया

लखनऊ में तलाक की याचिकाएं पारिवारिक न्यायालय अधिनियम, 1984 के तहत स्थापित फैमिली कोर्ट, लखनऊ में दाखिल की जाती हैं, जो सिविल कोर्ट परिसर के भीतर स्थित है। हिंदुओं के लिए तलाक हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 द्वारा शासित है; मुसलमानों के लिए संबंधित पर्सनल लॉ लागू होता है; और अंतर-धार्मिक विवाहों के लिए विशेष विवाह अधिनियम, 1954 लागू होता है। हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13-बी के तहत आपसी सहमति से तलाक के लिए दोनों पक्षों को संयुक्त याचिका दाखिल करनी होती है, कम से कम एक वर्ष से अलग रह रहे होना चाहिए, और दो अलग-अलग सुनवाइयों — पहली मोशन और दूसरी मोशन — में उपस्थित होना होता है, जिनके बीच छह महीने की सांविधिक प्रतीक्षा अवधि होती है, जिसे उपयुक्त परिस्थितियों में फैमिली कोर्ट लखनऊ द्वारा माफ किया जा सकता है। क्रूरता, परित्याग, व्यभिचार या मानसिक विकार जैसे आधारों पर दाखिल विवादित तलाक में याचिका दाखिल करना, प्रतिवादी को नोटिस की तामील, लिखित बयान दाखिल करना और गुण-दोष पर मुकदमा शामिल है। बच्चों की कस्टडी, धारा 144 BNSS (पूर्व धारा 125 CrPC) के तहत भरण-पोषण, और घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत कार्यवाही भी फैमिली कोर्ट लखनऊ और संबंधित अदालतों द्वारा निपटाई जाती है। आवश्यक दस्तावेजों में आमतौर पर विवाह प्रमाण पत्र, पता प्रमाण, पहचान प्रमाण और दोनों पक्षों की तस्वीरें शामिल हैं।

सामान्य सवाल

लखनऊ में पारिवारिक कानून अधिवक्ताअक्सर पूछे जाने वाले सवाल

यह पृष्ठ केवल सामान्य जानकारी के लिए है और कानूनी सलाह या याचना (solicitation) नहीं है। परिणाम प्रत्येक मामले के तथ्यों पर निर्भर करते हैं। भारतीय बार काउंसिल के नियमों के अनुसार, यह वेबसाइट कार्य का विज्ञापन या याचना नहीं करती।

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